4.12.08

मुंबई २६/११

आगये आगये आतंगवादी आगये
मर गए मर गए हाय हम मर गए
२६/११ को नही मरे
मरे तो तब थे जब १९४७ में देश के दो हिस्से हुए थे
अरे मरे थो तब थे जब पाकिस्तान बना था
मर तो बहुत पहले ही गए थे
अभी तो केवल जान निकली है
बहुत सीधी सी बात है पाकिस्तान के साथ
हमारे सम्बन्ध कभी भी नही बन सकते हैं
वो देश ही नही है
वो तो एक नासूर है
जिसको काट के फेंक ही देना चाइये
हमारे यंहा के नेता
माँ का दूध भूल चुके हैं
इतना तो कर सकते हैं
उन पाकिस्तानियों को चढी का दूध तो याद दिला सकते हैं
रोज़ रोज़ ५०० सपूतो के मरने से बेहतर है
एक बार लाख मरे
बस एक बार

29.11.08

इस चौबारे में

क्या रखा है मन्दिर मस्जिद -गुरूद्वारे में
आओ सब यंही तेरे घर के चौबारे मैं
दिया जलता है यंहा हर पहर
बस तो पैदा कर वो नज़र
सोचता क्यूँ है अपने गम के बारे मैं
हर मुस्किल आसान होगी तेरे घर के चौबारे मैं
जो चाहेगा वो पायेगा
मत घबरा आख़िर भाग के कंहा जायेगा
जायेगा कंहा -कंहा सर पटकेगा किस द्वारे मैं
लोट कर आना ही होगा तुझे तेरे घर के चौबारे मैं
तू क्या खोजता है सच बता जो तू खोजता है वो तुझे मिलता है
यह ग्रन्ध यह पोथी कुछ नही है इस नारे मैं
आ तुझे आना ही होगा अपने घर के चौबारे मैं
माँ की ममता बाप का साया जड़ें तेरी यंही है
जीवन का हर सुख तुने यंही से पाया
चमकेगा तू चाहे रौशनी उतनी हो जितनी तारे मैं
एक बार बस आजा तेरे घर के चौबारे मैं
क्यूँ सोचता है तू अकेला है
देख ये देश हवा पशु पक्षी और सबसे बड़ी ये पूरी प्रकृति इन सब का मेला है
फ़िर क्यूँ जाता है मन्दिर -मस्जिद-गुरूद्वारे मैं
सब तेरे अपने हैं बस तू न जा कंही रह अपने घर के चौबारे मैं
यह वही चौबारा है ताकत से जिसकी प्रह्लाद ने हिरन्यकश्यप को मारा है
यह वही चौबारा है अजमेर से हाजी अली ने सवांरा है
यह वही चौबारा है ताकत से आजाद हिंद हमारा हैekta
एकता के पवन सूत्र मैं बंध जायें हम बढे ताकत हमारे मैं
बस एक जुट होना ही होगा हमें इस घर के चौबारे मैं

आकृति

मात्रत्व के आभास की अनुपम लहर है आकृति
हमारे अभिसार की अनुभूति है आकृति
ममता के सहेज भावः की अभियक्ति है आकृति
गौरव मेरा विश्वास मेरा और संपूर्ण संसार है आकृति
एक छोटा सा बदन धकरण
आँखे सजग ,किल्कारिन और रुदन को समाहित करने से बना एक
समीकरण है आकृति
मेरे जीवन की जीवंत रचना यानि कृति है आकृति

पुलिश

मिल गया मुझे कोतवाल
पुछा मैंने कहो कैसे है हाल
बोला बड़ी मायूसी से पूछते हो हाल
हाल तो हैं बड़े बेहाल
घट गए हैं रेट मुस्किल से भर पाता है पेट
चोरी चमारी डकेती डाका -इसमे तो है फाका ही फाका
हाँ गर हो मुजरिम खून का -मिल जाता है आटा दो जून का
अब तो और भी विभाग करने लगे हैं रिश्वत लेने का काम
पुलिश तो है नाम की बदनाम
जब इनका यह हिया हाल
तब हम आम नागरिक का तो आ गया काल

20.9.08

कुछ न बचा

दस साल शादी के हो गए
प्यार जो था वो दे तो दिया
कुल जमा दो बच्चे भी हो गए
अभी एक साल से ऐसा हो रहा है
पैसा आ नही रहा
खर्चा खूब हो रहा है
पैसे आने की सम्भावना तो है
पर भाई
वर्तमान ख़राब है
भविष्य में पूरे होते दीखते ख़ाब है
पर इस बीवी का क्या करु
जिसका धैर्य दे गया जवाब है
वो मेरी जिन्दगी से जा रही है
पर असल में वो तो
बच्चओं को परे ताक़ पर रख कर जा रही है
मेरे तो दस साल जाया हो गए
कम से कम एक बच्चे के भी दस साल खराब हो गए
एक ऐसा शख्स जिसने एक परिवार के
बीस साल खराब किए हो
उसे क्या सज़ा मुकरर हो
इसका फ़ैसला अब दुनिया के ऊपर है
आपके ऊपर है

12.7.08

namaste

नमस्ते एक कला है
किसी को फला है
किसी को नही फला है
नमस्ते किसी को भी कर सकते
नमस्ते किसी का भी ले सकते हो
नमस्ते -नमस्ते करते करते कोई भी काम करा सकते हो
नमस्ते नमस्ते लेते लेते किसी का भी काम कर सकते हो
हाथ जोड़ने में और नमस्ते करने में
काफी अन्तर होता है
हाथ जोड़ना अपने स्वाभिमान को छोटा करना होता है
अस्तु
नमस्ते करना ,अपने स्वाभिमान को दर्शाना होता है
हमेशा नमस्ते करना
ऊपर वाले के सामने हाथ जोड़ना
जब अन्तिम समय आए
नमस्ते करना
धन्यवाद देना दुनिया को
नमस्ते कर विदा लेना
नमस्ते नमस्ते नमस्ते

21.1.08

कुछ खोया कुछ पाया

जिन्दगी में कुछ खोया कुछ पाया
सोचता हूँ कभी कभी क्या ज्यादा खोया
या फिर ज्यादा पाया
असल में पाया वही जाता है
जो खो जाता है
तो बात इतनी सी है
इन्सान जो खोता है
वही पाता है
क्या आप बता सकते हैं ऐसा कोई इन्सान
जिसने जिन्दगी में केवल पाया हो
खोया कुछ भी नही हो
शायद नही
दुनिया में कोई आज तक पैदा नही हुआ
जिसने कुछ खोया नही हो
तो फिर क्यों डरते हो ,क्यों परेशां होते हो
जब तुम्हारा कुछ खो जाता है
कुछ खो जाता है
कुछ पाने के लिए
खो दो अपना जीवन ,खो दो अपनी आत्मा
परमात्मा को पाने के लिए