30.12.08

" नया कदम "

क्या सोचा था ,क्या मिला
फ़िर कुछ कर गुजरने की तमन्ना लिए
अगले साल में कदम रखते हैं
वो पलों को साथ लेकर
जो पल हमने बेहतरीन ढंग से जिए
मुबारक हो तुम्हे नया साल
इस साल वो हर अच्छा काम करना
जो तुमने अभी तक नही किए

23.12.08

" ख़बर "

ये लो शान्ति बहन मिठाई खाओ ,क्यों बहन किस बात की मिठाई खिला रही हो सरला बहन ,अरे मेरे अशोक की नौकरी लग गई है .अशोक की माँ बोली ,चलो अच्छा हुआ अब तो उसकी शादी की चिंता करो ,अरे चिंता किस बात की मेरा अशोक तो लाखो में एक है उसको तो सर्व गुन संपन पत्नी मिलेगी ,अच्छा चलूँ अशोक आता ही होगा।
अशोक जब छोटा ही था तभी उसके पिता चल बसे बहुत कठिनाई सह कर मेने पालाहै उसे और कितना अच्छा निकला मेरा बेटा बिल्कुल बाप पर गया है कितना कहना मानता है मेरा ,न पान-बीडी ,न सिगरेट -तम्बाकू और न शराब आदि से दूर रहता है अब तो उसकी नौकरी भी लग गई है अब तो बस जल्दी से उसकी शादी कर एक सुंदर सी बहु ले आऊं यही सपना था अशोक के पिताजी का ,।
सोचती जा रही है सरला ,तभी अचानक आवाज आती है ,"बहन जी जरा सुनिए ",सरला मुड़कर देखती है "क्या हुआ ,बहन जी अशोक का एक्सीडेंट हो गया है ."क्या! कह कर सरला बेहोश हो जाती है ।
दुसरे दिन अख़बार में ख़बर छपती है -:
"दुर्खाटना में एक मौत "
'कानपूर ११ जनवरी दिन सोमवार गाँधी चौक के पास एक ट्रक ने स्कूटर चालक को टक्कर मार दी स्कूटर चालक ग़लत दिशा में जा रहा था ,एस्थानीय नागिरिकों की सहायता से स्कूटर चालक को हॉस्पिटल पहुँचा दिया है बाद में स्कूटर चालक ने यंहा दम तोड़ दिया ।
उलेखनीय है की स्कूटर चालक इनकम टैक्स में काम करता था उसके पास से बारामत कागजात से पता चला है की उसका नाम अशोक है और पोस्टमारतं की रिपोर्ट से पता चलता है की मृतक शराब पिए हुए था और शराब पीने का आदि था । "

4.12.08

मुंबई २६/११

आगये आगये आतंगवादी आगये
मर गए मर गए हाय हम मर गए
२६/११ को नही मरे
मरे तो तब थे जब १९४७ में देश के दो हिस्से हुए थे
अरे मरे थो तब थे जब पाकिस्तान बना था
मर तो बहुत पहले ही गए थे
अभी तो केवल जान निकली है
बहुत सीधी सी बात है पाकिस्तान के साथ
हमारे सम्बन्ध कभी भी नही बन सकते हैं
वो देश ही नही है
वो तो एक नासूर है
जिसको काट के फेंक ही देना चाइये
हमारे यंहा के नेता
माँ का दूध भूल चुके हैं
इतना तो कर सकते हैं
उन पाकिस्तानियों को चढी का दूध तो याद दिला सकते हैं
रोज़ रोज़ ५०० सपूतो के मरने से बेहतर है
एक बार लाख मरे
बस एक बार

29.11.08

इस चौबारे में

क्या रखा है मन्दिर मस्जिद -गुरूद्वारे में
आओ सब यंही तेरे घर के चौबारे मैं
दिया जलता है यंहा हर पहर
बस तो पैदा कर वो नज़र
सोचता क्यूँ है अपने गम के बारे मैं
हर मुस्किल आसान होगी तेरे घर के चौबारे मैं
जो चाहेगा वो पायेगा
मत घबरा आख़िर भाग के कंहा जायेगा
जायेगा कंहा -कंहा सर पटकेगा किस द्वारे मैं
लोट कर आना ही होगा तुझे तेरे घर के चौबारे मैं
तू क्या खोजता है सच बता जो तू खोजता है वो तुझे मिलता है
यह ग्रन्ध यह पोथी कुछ नही है इस नारे मैं
आ तुझे आना ही होगा अपने घर के चौबारे मैं
माँ की ममता बाप का साया जड़ें तेरी यंही है
जीवन का हर सुख तुने यंही से पाया
चमकेगा तू चाहे रौशनी उतनी हो जितनी तारे मैं
एक बार बस आजा तेरे घर के चौबारे मैं
क्यूँ सोचता है तू अकेला है
देख ये देश हवा पशु पक्षी और सबसे बड़ी ये पूरी प्रकृति इन सब का मेला है
फ़िर क्यूँ जाता है मन्दिर -मस्जिद-गुरूद्वारे मैं
सब तेरे अपने हैं बस तू न जा कंही रह अपने घर के चौबारे मैं
यह वही चौबारा है ताकत से जिसकी प्रह्लाद ने हिरन्यकश्यप को मारा है
यह वही चौबारा है अजमेर से हाजी अली ने सवांरा है
यह वही चौबारा है ताकत से आजाद हिंद हमारा हैekta
एकता के पवन सूत्र मैं बंध जायें हम बढे ताकत हमारे मैं
बस एक जुट होना ही होगा हमें इस घर के चौबारे मैं

आकृति

मात्रत्व के आभास की अनुपम लहर है आकृति
हमारे अभिसार की अनुभूति है आकृति
ममता के सहेज भावः की अभियक्ति है आकृति
गौरव मेरा विश्वास मेरा और संपूर्ण संसार है आकृति
एक छोटा सा बदन धकरण
आँखे सजग ,किल्कारिन और रुदन को समाहित करने से बना एक
समीकरण है आकृति
मेरे जीवन की जीवंत रचना यानि कृति है आकृति

पुलिश

मिल गया मुझे कोतवाल
पुछा मैंने कहो कैसे है हाल
बोला बड़ी मायूसी से पूछते हो हाल
हाल तो हैं बड़े बेहाल
घट गए हैं रेट मुस्किल से भर पाता है पेट
चोरी चमारी डकेती डाका -इसमे तो है फाका ही फाका
हाँ गर हो मुजरिम खून का -मिल जाता है आटा दो जून का
अब तो और भी विभाग करने लगे हैं रिश्वत लेने का काम
पुलिश तो है नाम की बदनाम
जब इनका यह हिया हाल
तब हम आम नागरिक का तो आ गया काल

20.9.08

कुछ न बचा

दस साल शादी के हो गए
प्यार जो था वो दे तो दिया
कुल जमा दो बच्चे भी हो गए
अभी एक साल से ऐसा हो रहा है
पैसा आ नही रहा
खर्चा खूब हो रहा है
पैसे आने की सम्भावना तो है
पर भाई
वर्तमान ख़राब है
भविष्य में पूरे होते दीखते ख़ाब है
पर इस बीवी का क्या करु
जिसका धैर्य दे गया जवाब है
वो मेरी जिन्दगी से जा रही है
पर असल में वो तो
बच्चओं को परे ताक़ पर रख कर जा रही है
मेरे तो दस साल जाया हो गए
कम से कम एक बच्चे के भी दस साल खराब हो गए
एक ऐसा शख्स जिसने एक परिवार के
बीस साल खराब किए हो
उसे क्या सज़ा मुकरर हो
इसका फ़ैसला अब दुनिया के ऊपर है
आपके ऊपर है