27.2.11

रास्ट्रीय स्वस्थ्य बीमा योजना में घोटाला

सेवा में,
मैडम
मैं आपका ध्यान इधर उत्तेर प्रदेश में चल रहे महान भर्ष्टाचार की और दिलाना चाहता हूँ जो यंहा पर र।स।बी।य।योजना चला रहे करान्धारों के तुकलगी आदेशों के फलस्वरूप खूब फल फूल रही है ।र॥स।बी।य।योजना के अंतर्गत एम्पनेल्मेंट होने के लिए हॉस्पिटल के लिए केंद्रीय सरकार ने तय शुदा मानक बने लेकिन यंहा उत्तेर प्रदेश सरकार के होनहार अफसरों ने एम्पनेल्मेंट का अधिकार लोकल लेवल पर स्वस्ध्य निगरानी समिति को दे दिया है अब जम कर लूट हो रही है पहेले हॉस्पिटल स्वस्ध्य निगरानी समिति को संतुष्ट करना होगा जिसमे हर लेवेल पर पैसा चल रहा है और एम्पनेल्मेंट समय पर नहीं होंपा रहा है स्वस्ध्य निगरानी समिति में डी।डी.ओ,c डी.ओ.,c म.ओ.,डी.स.ओ.,डी.इ.ओ.और अध्यच जिलाधिकारी होते हैं अब आप खुद ही समझ सकती हैं की समिति की बैठक कब होगी इसका पता तो शायद ही किसी को हो.समिति के अनुमोदन के बाद पत्र शाशन जायेगा वहां से बीमा कंपनी जायेगा उपरांत टी.प.ये.का आदमी आएगा म.ओ.यु.शाइन करा के हॉस्पिटल का कार्ड बनने के लिए भेजा जायेगा.तकरीब तीस से चालीस दिनों में कार्ड बन कर आएगा कार्ड रेअदेर लग कर हॉस्पिटल इलाज शुरू कर पाएंगे .जबकि स्टेट गवर्मेंट ने जो टेंडर बीमा कंपनी के साथ किया है उस टेंडर के हिसाब से ये साफ़ साफ़ लिखा है एम्पनेल्मेंट privet होस्पितालों के बीमा कपानी खुद ही करेगी बल्कि उसको तो टेंडर दोकुमेंट के साथ एम्पनेल हॉस्पिटल की सूचि भी जमा करनी होगी.अब मैडम आपसे प्रार्धना है की हॉस्पिटल एम्पनेल्मेत की प्रक्रिया के बारे में उचित guideline अविलम्ब प्रेस वार्ता कर के जारी करने की कृपा करे जिस से scheme के stake होल्डर में से एक हॉस्पिटल सही तरीके से काम कर सकें.आपकी सहूलियत के लिए में साथ में टेंडर का कुछ भहाग भेज रहा हूँ आदर डॉक्टर मोहोपत्र

25.1.09

गणतंत्र दिवस

आज २६/०१ गणतंत्र दिवस की आपको बधाई हो
आज मैंने रोड पर बच्चों की परेड देखी अच्छा लगा उनके साथ उनके टीचर भी थे धोती, कुरता व सादरी पहने हुए ।
आज के ज़माने में भी जब की आज का स्टुडेंट २६ जनवरी को महज एक अवकाश मानता है ,इंग्लिश स्कूल में शिक्षा ग्रहण करने वाला स्टुडेंट आज २६ जनवरी के दिन घर में बैठ कर पिज्जा बर्गर खाताहै बाजार से लाकर कोई नई पिक्चर की डी.व्.डी देखना पसंद करता है ,उस ज़माने में यह परेड अच्छी लगी कम से कम इन बच्चों में देश के प्रति कुछ भावना तो जाग्रत होती है ।
२६के साथ २६/११ को भूलना नही क्योकि वो हादसा हमारे गणतंत्र के ऊपर एक अर्धविराम है ।
मैंने अपने ब्लॉग "ओबामा के नाम खुला ख़त " में लिखा था शायद वो ओबामा को पता चल गया वो वैसा ही कर रहे हैं ओबमाजी आपको सफलता मिलेगी क्योंकि आप सही रास्ता पाकर सही रास्ते में पहुचेंगे ।

19.1.09

बराक ओबामा के नाम खुला ख़त

दुनिया के ताकत वर देश के प्रेजिडेंट होने पर बधाई हो आपको
आप सोच रहे होंगे ये कौन है जो आपको बधाई दे रहा है तो जनाब मैं एक इन्सान हूँ जो इसी दुनिया का निवासी है
आपका देश जो इस प्रथ्वी में ही स्थिथित है पर काम करता है ,सोचता है दुसरे ग्रह के बारे में,चाँद पे पानी कब मिलेगा ,मून में पेट्रोल है की नही ,शुक्र में जिन्दगी थी की नही इत्यादि .पैसा जो आपके देश के लोग कमाकर टैक्स अदा करते है वो आपका देश बन्दूक बम गोली में खर्चा करता है फ़िर उस गोली के दम पर आपका देश कमजोर देश पर हमला कर उस देश से और पैसा लाता है उससे आप लोग अतोम बम बनाते हैं फ़िर उसको किसी देश में गिरा कर वंहा के पुसतो को अभिशप्त कर दे तें हैं ,इस से ही आपकी भूक शांत नही होती तो आपका देश किसी कम्जूर देश को नेस्तनाबूत कर वंहा "शुशाशन "इस्थापित कर ता है ।
कैसे दूर कर पायेगे इस कमजोरी को आप ओबामा जी आप जानते है की आप जिस देश की बागडोर अपने हाथ में लेने जा रहे है वो देश दुनिया का शायद सबसे डरपोक देश है .केवल एक हमले ने आपलोगों के कस्बल निकल दिए
सोचये उनके बारे में जिनके ऊपर आपके देश ने बिना किसी बात के हमला किया ?
आपका देश दुनिया के उन देशों को पैसा देता है जो देश "आतंग्वादी"देश कहे जाने योग्य हैं उनका काम दुसरे देशों पर हमला करना है वंहा आतंग्वाद फैलाना है अस्तु उक्त प्रायोजित आतंग्वाद की जड़ आपका ही देश है क्या आप देख पाओगे ?
आपके अपने ही यंहा लाखो लोगो की नौकरी जा रही है नस्लवाद फैलता ही जा रहा है आपके ही पाले हुए लोग अब आपके लोगो को काटने आ रहे है जो कांटे आपके देश ने दूसरो के लिए बोए थे वो अब आपके देश में ही फैलते जा रहे है काटोगे या चुन पाओगे ?
प्रेजिडेंट ओबामा जी रूस से तो निबट लिए लेकिन रूस से कंही ज्यादा खतरा तो चीन से है सही बात तो ये है की आपका देश शुरू से चाहता रहा है की पाकिस्तान पर आपका कब्जा हो जाए जिस से आपका देश हिंदुस्तान ,चीन पुरे दक्षिण एशिया में अपना दबदबाबना सके ओबामा जी ऐसा जब तक नही हो सकता जब तक चीन आपके काबू में न आए क्या आप कर सकेंगे ?
आपके पहले तीन साल तो अपने देश की माली हालत को सुधरने में ही लग जायेंगे बाकि के साल आपको ये समझने में लग जायेगे की यह हुआ तो क्यूँ हुआ इसके साथ साथ इरान ,पाकिस्तान आदि देशों को भी निपटने का एजेंडा आपके लोगो ने आपको बताना है
क्या कहते हैं इस बतकही का ओबामा शाब

10.1.09

"हमला" " वर "

ये साला ब्लड प्रेशर ज्यादा होता है तो परेशानी
कम होता है तो परेशानी
हमला होता है तो ज्यादा हो जाता है
उर्दू में "हमला "माने होता है आपकी बीवी गर्भवती है
पाकिस्तान के सारे नवजवान "हमला "हो गए हैं
खूब पैदा कर रहे हैं
वहां के नेता भी "हमला" हो रहे हें
अपनी अवाम के "काम "लगा रहे हें
जिस वतन का हर नागरिक हमलावर हो
वहां पर जीना मशाल्ल्हा
या अल्लाह हो अकबर
ले तू इनकी ख़बर
ये हें अभी बेखबर
ये नादाँ हें
ये समझते हें
जो कुछ ये करते हें
वो आसान है
पहले अपनी माँ
को मारते हें
फिर किसी के बेटे को मारते हें
इनका कथित जेहाद यही बोलता है
पहले अपनी माँ को मारो
वो "हमला"हो जाए और तुम "वर " बन जाओ

30.12.08

" सोचता हूँ "

जीवन में बहुत कुछ मिल जाता है अनायास
मिलता तो वो नही है जिसकी होती है आस
पूजा -पाठ,कर्म-धर्म शान्ति के उपाए हैं
जिन्दगी क्या है
अन्तिम पल तो केवल चार पाए हैं
आदमी क्या चाहता है
अफ़सोस किस लिए करता है
जब वो पाता है
ये जो दाता है
वो सबको बराबर दे जाता है
आदमी केवल उतना ही पाता है
जितना की वो ले पाता है
बस यही एक कमजोरी है
हर जिन्दगी की बस एक मजबूरी है
संघर्ष हर आदमी कर सकता है
मालूम है सबको हर संघर्ष का मूल्य होता है
पर क्या करे इन्सान
आज हो गया है बैमान
जब वास्तव में उसकी मेहनत का सही मूल्य नही मिल पाता है
तब वो भ्रष्टाचारी-यभिचारी हो जाता है
आदमी को जरूरत है उसके मूल्याकन की
और जरूरत है एक वास्तिविक मुस्कान की
उचित दाम मिले उसको उसकी मेहनत का
तभी सफल होगा जीवन हर इन्सान का
ख़तम होगा तभी भरष्टाचार और खुदगर्जी
नही दिखायेगा भाग्य अपनी ताकत और मर्जी
आओ हम अपने जीवन को सफल बनाये
ख़ुद सुखी रहे
कर्म ऐसा करे
सब सुख पायें
"सर्वे भवन्तु सुखिना सर्वे सन्तु निरामय सर्वे भद्राणि पश्यन्तु माँ कश्चित् दुख्भाग्वीत "

" महाभारत "

जीवन के चक्रावियु में फँस गया हूँ ,
न में हूँ कोई अभिमन्यु ,
न मिली मुझे कोई उत्तरा,
न मिली मुझे कोई अर्जुन ,
बचा हुआ है जो ,
वो है केवल मेरा आत्मविश्वास ।
रथ मेरा बिना सारथि के है ,
दिशा हीन पथ भर्स्ट सा ,
मानो एक अज्ञात मंजिल की ओर ,
बढता चला जा रहा हूँ मैं ,
हाँ अब शुरू हो गई है महाभारत ।
जीत तो हमेशा पञ्च पांडव की होती है ।
जी हाँ मेरी अपनी पञ्च इन्द्रियां बाकि हैं ।
बाकि है थोड़ा अताम्विश्वास ,
बाकि है अभी थोड़ा सत्य ,
और अभी थोड़ा पराक्रम बाकि है ।
रथ मेरा पथ विचलित है तो क्या ?
में तो पथ विचलित नही,
आशा बाकि है अभी " कृष्ण " के मिलने की ,
और मुझे तो ये भी मालूम है ।
" " कर्मण्य वाधिकारस्ते माँ फल्येशु कदाचन ""
करम ही तो कर रहा हूँ ।
मेने फल की आशा त्याग दी है ।

" नया कदम "

क्या सोचा था ,क्या मिला
फ़िर कुछ कर गुजरने की तमन्ना लिए
अगले साल में कदम रखते हैं
वो पलों को साथ लेकर
जो पल हमने बेहतरीन ढंग से जिए
मुबारक हो तुम्हे नया साल
इस साल वो हर अच्छा काम करना
जो तुमने अभी तक नही किए