आज २६/०१ गणतंत्र दिवस की आपको बधाई हो
आज मैंने रोड पर बच्चों की परेड देखी अच्छा लगा उनके साथ उनके टीचर भी थे धोती, कुरता व सादरी पहने हुए ।
आज के ज़माने में भी जब की आज का स्टुडेंट २६ जनवरी को महज एक अवकाश मानता है ,इंग्लिश स्कूल में शिक्षा ग्रहण करने वाला स्टुडेंट आज २६ जनवरी के दिन घर में बैठ कर पिज्जा बर्गर खाताहै बाजार से लाकर कोई नई पिक्चर की डी.व्.डी देखना पसंद करता है ,उस ज़माने में यह परेड अच्छी लगी कम से कम इन बच्चों में देश के प्रति कुछ भावना तो जाग्रत होती है ।
२६के साथ २६/११ को भूलना नही क्योकि वो हादसा हमारे गणतंत्र के ऊपर एक अर्धविराम है ।
मैंने अपने ब्लॉग "ओबामा के नाम खुला ख़त " में लिखा था शायद वो ओबामा को पता चल गया वो वैसा ही कर रहे हैं ओबमाजी आपको सफलता मिलेगी क्योंकि आप सही रास्ता पाकर सही रास्ते में पहुचेंगे ।
25.1.09
19.1.09
बराक ओबामा के नाम खुला ख़त
दुनिया के ताकत वर देश के प्रेजिडेंट होने पर बधाई हो आपको
आप सोच रहे होंगे ये कौन है जो आपको बधाई दे रहा है तो जनाब मैं एक इन्सान हूँ जो इसी दुनिया का निवासी है
आपका देश जो इस प्रथ्वी में ही स्थिथित है पर काम करता है ,सोचता है दुसरे ग्रह के बारे में,चाँद पे पानी कब मिलेगा ,मून में पेट्रोल है की नही ,शुक्र में जिन्दगी थी की नही इत्यादि .पैसा जो आपके देश के लोग कमाकर टैक्स अदा करते है वो आपका देश बन्दूक बम गोली में खर्चा करता है फ़िर उस गोली के दम पर आपका देश कमजोर देश पर हमला कर उस देश से और पैसा लाता है उससे आप लोग अतोम बम बनाते हैं फ़िर उसको किसी देश में गिरा कर वंहा के पुसतो को अभिशप्त कर दे तें हैं ,इस से ही आपकी भूक शांत नही होती तो आपका देश किसी कम्जूर देश को नेस्तनाबूत कर वंहा "शुशाशन "इस्थापित कर ता है ।
कैसे दूर कर पायेगे इस कमजोरी को आप ओबामा जी आप जानते है की आप जिस देश की बागडोर अपने हाथ में लेने जा रहे है वो देश दुनिया का शायद सबसे डरपोक देश है .केवल एक हमले ने आपलोगों के कस्बल निकल दिए
सोचये उनके बारे में जिनके ऊपर आपके देश ने बिना किसी बात के हमला किया ?
आपका देश दुनिया के उन देशों को पैसा देता है जो देश "आतंग्वादी"देश कहे जाने योग्य हैं उनका काम दुसरे देशों पर हमला करना है वंहा आतंग्वाद फैलाना है अस्तु उक्त प्रायोजित आतंग्वाद की जड़ आपका ही देश है क्या आप देख पाओगे ?
आपके अपने ही यंहा लाखो लोगो की नौकरी जा रही है नस्लवाद फैलता ही जा रहा है आपके ही पाले हुए लोग अब आपके लोगो को काटने आ रहे है जो कांटे आपके देश ने दूसरो के लिए बोए थे वो अब आपके देश में ही फैलते जा रहे है काटोगे या चुन पाओगे ?
प्रेजिडेंट ओबामा जी रूस से तो निबट लिए लेकिन रूस से कंही ज्यादा खतरा तो चीन से है सही बात तो ये है की आपका देश शुरू से चाहता रहा है की पाकिस्तान पर आपका कब्जा हो जाए जिस से आपका देश हिंदुस्तान ,चीन पुरे दक्षिण एशिया में अपना दबदबाबना सके ओबामा जी ऐसा जब तक नही हो सकता जब तक चीन आपके काबू में न आए क्या आप कर सकेंगे ?
आपके पहले तीन साल तो अपने देश की माली हालत को सुधरने में ही लग जायेंगे बाकि के साल आपको ये समझने में लग जायेगे की यह हुआ तो क्यूँ हुआ इसके साथ साथ इरान ,पाकिस्तान आदि देशों को भी निपटने का एजेंडा आपके लोगो ने आपको बताना है
क्या कहते हैं इस बतकही का ओबामा शाब
आप सोच रहे होंगे ये कौन है जो आपको बधाई दे रहा है तो जनाब मैं एक इन्सान हूँ जो इसी दुनिया का निवासी है
आपका देश जो इस प्रथ्वी में ही स्थिथित है पर काम करता है ,सोचता है दुसरे ग्रह के बारे में,चाँद पे पानी कब मिलेगा ,मून में पेट्रोल है की नही ,शुक्र में जिन्दगी थी की नही इत्यादि .पैसा जो आपके देश के लोग कमाकर टैक्स अदा करते है वो आपका देश बन्दूक बम गोली में खर्चा करता है फ़िर उस गोली के दम पर आपका देश कमजोर देश पर हमला कर उस देश से और पैसा लाता है उससे आप लोग अतोम बम बनाते हैं फ़िर उसको किसी देश में गिरा कर वंहा के पुसतो को अभिशप्त कर दे तें हैं ,इस से ही आपकी भूक शांत नही होती तो आपका देश किसी कम्जूर देश को नेस्तनाबूत कर वंहा "शुशाशन "इस्थापित कर ता है ।
कैसे दूर कर पायेगे इस कमजोरी को आप ओबामा जी आप जानते है की आप जिस देश की बागडोर अपने हाथ में लेने जा रहे है वो देश दुनिया का शायद सबसे डरपोक देश है .केवल एक हमले ने आपलोगों के कस्बल निकल दिए
सोचये उनके बारे में जिनके ऊपर आपके देश ने बिना किसी बात के हमला किया ?
आपका देश दुनिया के उन देशों को पैसा देता है जो देश "आतंग्वादी"देश कहे जाने योग्य हैं उनका काम दुसरे देशों पर हमला करना है वंहा आतंग्वाद फैलाना है अस्तु उक्त प्रायोजित आतंग्वाद की जड़ आपका ही देश है क्या आप देख पाओगे ?
आपके अपने ही यंहा लाखो लोगो की नौकरी जा रही है नस्लवाद फैलता ही जा रहा है आपके ही पाले हुए लोग अब आपके लोगो को काटने आ रहे है जो कांटे आपके देश ने दूसरो के लिए बोए थे वो अब आपके देश में ही फैलते जा रहे है काटोगे या चुन पाओगे ?
प्रेजिडेंट ओबामा जी रूस से तो निबट लिए लेकिन रूस से कंही ज्यादा खतरा तो चीन से है सही बात तो ये है की आपका देश शुरू से चाहता रहा है की पाकिस्तान पर आपका कब्जा हो जाए जिस से आपका देश हिंदुस्तान ,चीन पुरे दक्षिण एशिया में अपना दबदबाबना सके ओबामा जी ऐसा जब तक नही हो सकता जब तक चीन आपके काबू में न आए क्या आप कर सकेंगे ?
आपके पहले तीन साल तो अपने देश की माली हालत को सुधरने में ही लग जायेंगे बाकि के साल आपको ये समझने में लग जायेगे की यह हुआ तो क्यूँ हुआ इसके साथ साथ इरान ,पाकिस्तान आदि देशों को भी निपटने का एजेंडा आपके लोगो ने आपको बताना है
क्या कहते हैं इस बतकही का ओबामा शाब
10.1.09
"हमला" " वर "
ये साला ब्लड प्रेशर ज्यादा होता है तो परेशानी
कम होता है तो परेशानी
हमला होता है तो ज्यादा हो जाता है
उर्दू में "हमला "माने होता है आपकी बीवी गर्भवती है
पाकिस्तान के सारे नवजवान "हमला "हो गए हैं
खूब पैदा कर रहे हैं
वहां के नेता भी "हमला" हो रहे हें
अपनी अवाम के "काम "लगा रहे हें
जिस वतन का हर नागरिक हमलावर हो
वहां पर जीना मशाल्ल्हा
या अल्लाह हो अकबर
ले तू इनकी ख़बर
ये हें अभी बेखबर
ये नादाँ हें
ये समझते हें
जो कुछ ये करते हें
वो आसान है
पहले अपनी माँ
को मारते हें
फिर किसी के बेटे को मारते हें
इनका कथित जेहाद यही बोलता है
पहले अपनी माँ को मारो
वो "हमला"हो जाए और तुम "वर " बन जाओ
कम होता है तो परेशानी
हमला होता है तो ज्यादा हो जाता है
उर्दू में "हमला "माने होता है आपकी बीवी गर्भवती है
पाकिस्तान के सारे नवजवान "हमला "हो गए हैं
खूब पैदा कर रहे हैं
वहां के नेता भी "हमला" हो रहे हें
अपनी अवाम के "काम "लगा रहे हें
जिस वतन का हर नागरिक हमलावर हो
वहां पर जीना मशाल्ल्हा
या अल्लाह हो अकबर
ले तू इनकी ख़बर
ये हें अभी बेखबर
ये नादाँ हें
ये समझते हें
जो कुछ ये करते हें
वो आसान है
पहले अपनी माँ
को मारते हें
फिर किसी के बेटे को मारते हें
इनका कथित जेहाद यही बोलता है
पहले अपनी माँ को मारो
वो "हमला"हो जाए और तुम "वर " बन जाओ
30.12.08
" सोचता हूँ "
जीवन में बहुत कुछ मिल जाता है अनायास
मिलता तो वो नही है जिसकी होती है आस
पूजा -पाठ,कर्म-धर्म शान्ति के उपाए हैं
जिन्दगी क्या है
अन्तिम पल तो केवल चार पाए हैं
आदमी क्या चाहता है
अफ़सोस किस लिए करता है
जब वो पाता है
ये जो दाता है
वो सबको बराबर दे जाता है
आदमी केवल उतना ही पाता है
जितना की वो ले पाता है
बस यही एक कमजोरी है
हर जिन्दगी की बस एक मजबूरी है
संघर्ष हर आदमी कर सकता है
मालूम है सबको हर संघर्ष का मूल्य होता है
पर क्या करे इन्सान
आज हो गया है बैमान
जब वास्तव में उसकी मेहनत का सही मूल्य नही मिल पाता है
तब वो भ्रष्टाचारी-यभिचारी हो जाता है
आदमी को जरूरत है उसके मूल्याकन की
और जरूरत है एक वास्तिविक मुस्कान की
उचित दाम मिले उसको उसकी मेहनत का
तभी सफल होगा जीवन हर इन्सान का
ख़तम होगा तभी भरष्टाचार और खुदगर्जी
नही दिखायेगा भाग्य अपनी ताकत और मर्जी
आओ हम अपने जीवन को सफल बनाये
ख़ुद सुखी रहे
कर्म ऐसा करे
सब सुख पायें
"सर्वे भवन्तु सुखिना सर्वे सन्तु निरामय सर्वे भद्राणि पश्यन्तु माँ कश्चित् दुख्भाग्वीत "
मिलता तो वो नही है जिसकी होती है आस
पूजा -पाठ,कर्म-धर्म शान्ति के उपाए हैं
जिन्दगी क्या है
अन्तिम पल तो केवल चार पाए हैं
आदमी क्या चाहता है
अफ़सोस किस लिए करता है
जब वो पाता है
ये जो दाता है
वो सबको बराबर दे जाता है
आदमी केवल उतना ही पाता है
जितना की वो ले पाता है
बस यही एक कमजोरी है
हर जिन्दगी की बस एक मजबूरी है
संघर्ष हर आदमी कर सकता है
मालूम है सबको हर संघर्ष का मूल्य होता है
पर क्या करे इन्सान
आज हो गया है बैमान
जब वास्तव में उसकी मेहनत का सही मूल्य नही मिल पाता है
तब वो भ्रष्टाचारी-यभिचारी हो जाता है
आदमी को जरूरत है उसके मूल्याकन की
और जरूरत है एक वास्तिविक मुस्कान की
उचित दाम मिले उसको उसकी मेहनत का
तभी सफल होगा जीवन हर इन्सान का
ख़तम होगा तभी भरष्टाचार और खुदगर्जी
नही दिखायेगा भाग्य अपनी ताकत और मर्जी
आओ हम अपने जीवन को सफल बनाये
ख़ुद सुखी रहे
कर्म ऐसा करे
सब सुख पायें
"सर्वे भवन्तु सुखिना सर्वे सन्तु निरामय सर्वे भद्राणि पश्यन्तु माँ कश्चित् दुख्भाग्वीत "
" महाभारत "
जीवन के चक्रावियु में फँस गया हूँ ,
न में हूँ कोई अभिमन्यु ,
न मिली मुझे कोई उत्तरा,
न मिली मुझे कोई अर्जुन ,
बचा हुआ है जो ,
वो है केवल मेरा आत्मविश्वास ।
रथ मेरा बिना सारथि के है ,
दिशा हीन पथ भर्स्ट सा ,
मानो एक अज्ञात मंजिल की ओर ,
बढता चला जा रहा हूँ मैं ,
हाँ अब शुरू हो गई है महाभारत ।
जीत तो हमेशा पञ्च पांडव की होती है ।
जी हाँ मेरी अपनी पञ्च इन्द्रियां बाकि हैं ।
बाकि है थोड़ा अताम्विश्वास ,
बाकि है अभी थोड़ा सत्य ,
और अभी थोड़ा पराक्रम बाकि है ।
रथ मेरा पथ विचलित है तो क्या ?
में तो पथ विचलित नही,
आशा बाकि है अभी " कृष्ण " के मिलने की ,
और मुझे तो ये भी मालूम है ।
" " कर्मण्य वाधिकारस्ते माँ फल्येशु कदाचन ""
करम ही तो कर रहा हूँ ।
मेने फल की आशा त्याग दी है ।
" नया कदम "
क्या सोचा था ,क्या मिला
फ़िर कुछ कर गुजरने की तमन्ना लिए
अगले साल में कदम रखते हैं
वो पलों को साथ लेकर
जो पल हमने बेहतरीन ढंग से जिए
मुबारक हो तुम्हे नया साल
इस साल वो हर अच्छा काम करना
जो तुमने अभी तक नही किए
23.12.08
" ख़बर "
ये लो शान्ति बहन मिठाई खाओ ,क्यों बहन किस बात की मिठाई खिला रही हो सरला बहन ,अरे मेरे अशोक की नौकरी लग गई है .अशोक की माँ बोली ,चलो अच्छा हुआ अब तो उसकी शादी की चिंता करो ,अरे चिंता किस बात की मेरा अशोक तो लाखो में एक है उसको तो सर्व गुन संपन पत्नी मिलेगी ,अच्छा चलूँ अशोक आता ही होगा।
अशोक जब छोटा ही था तभी उसके पिता चल बसे बहुत कठिनाई सह कर मेने पालाहै उसे और कितना अच्छा निकला मेरा बेटा बिल्कुल बाप पर गया है कितना कहना मानता है मेरा ,न पान-बीडी ,न सिगरेट -तम्बाकू और न शराब आदि से दूर रहता है अब तो उसकी नौकरी भी लग गई है अब तो बस जल्दी से उसकी शादी कर एक सुंदर सी बहु ले आऊं यही सपना था अशोक के पिताजी का ,।
सोचती जा रही है सरला ,तभी अचानक आवाज आती है ,"बहन जी जरा सुनिए ",सरला मुड़कर देखती है "क्या हुआ ,बहन जी अशोक का एक्सीडेंट हो गया है ."क्या! कह कर सरला बेहोश हो जाती है ।
दुसरे दिन अख़बार में ख़बर छपती है -:
"दुर्खाटना में एक मौत "
'कानपूर ११ जनवरी दिन सोमवार गाँधी चौक के पास एक ट्रक ने स्कूटर चालक को टक्कर मार दी स्कूटर चालक ग़लत दिशा में जा रहा था ,एस्थानीय नागिरिकों की सहायता से स्कूटर चालक को हॉस्पिटल पहुँचा दिया है बाद में स्कूटर चालक ने यंहा दम तोड़ दिया ।
उलेखनीय है की स्कूटर चालक इनकम टैक्स में काम करता था उसके पास से बारामत कागजात से पता चला है की उसका नाम अशोक है और पोस्टमारतं की रिपोर्ट से पता चलता है की मृतक शराब पिए हुए था और शराब पीने का आदि था । "
अशोक जब छोटा ही था तभी उसके पिता चल बसे बहुत कठिनाई सह कर मेने पालाहै उसे और कितना अच्छा निकला मेरा बेटा बिल्कुल बाप पर गया है कितना कहना मानता है मेरा ,न पान-बीडी ,न सिगरेट -तम्बाकू और न शराब आदि से दूर रहता है अब तो उसकी नौकरी भी लग गई है अब तो बस जल्दी से उसकी शादी कर एक सुंदर सी बहु ले आऊं यही सपना था अशोक के पिताजी का ,।
सोचती जा रही है सरला ,तभी अचानक आवाज आती है ,"बहन जी जरा सुनिए ",सरला मुड़कर देखती है "क्या हुआ ,बहन जी अशोक का एक्सीडेंट हो गया है ."क्या! कह कर सरला बेहोश हो जाती है ।
दुसरे दिन अख़बार में ख़बर छपती है -:
"दुर्खाटना में एक मौत "
'कानपूर ११ जनवरी दिन सोमवार गाँधी चौक के पास एक ट्रक ने स्कूटर चालक को टक्कर मार दी स्कूटर चालक ग़लत दिशा में जा रहा था ,एस्थानीय नागिरिकों की सहायता से स्कूटर चालक को हॉस्पिटल पहुँचा दिया है बाद में स्कूटर चालक ने यंहा दम तोड़ दिया ।
उलेखनीय है की स्कूटर चालक इनकम टैक्स में काम करता था उसके पास से बारामत कागजात से पता चला है की उसका नाम अशोक है और पोस्टमारतं की रिपोर्ट से पता चलता है की मृतक शराब पिए हुए था और शराब पीने का आदि था । "
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